प्राचीन मानव प्रजाति का अस्तित्व के लिए संघर्ष

human race

प्राचीन मानव प्रजाति का अस्तित्व के लिए संघर्ष – 

द इथियोपिया के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम हिस्से में बसा ओमो नेशनल पार्क कोई साधारण जंगल नहीं है ।इसे 1980 में यूनेस्को ने विश्व विरासत घोषित किया क्योंकि इसी जंगल में दुनिया में 195000 वर्ष पूर्वआधुनिक मानव के सबसे पहले पूर्वज जिसे होमो सेपियंस कहते है, ने जन्म लिया था । दुनिया के पहले कपि मानव होमो Heidelberg (जिसके जीवाश्म जर्मनी के हैडलबेर्ग में 1907 में ओटो स्कॉएटेंसक ने खोजे थे) का आविर्भाव भी इसी क्षेत्र में लगभग 7 लाख वर्ष पूर्व हुआ था ।यह नेशनल पार्क ओमो बोटटेगो नदी के पश्चिम की ओर इथियोपिया के 3 प्रान्तों के 4068 वर्ग किमी में फैला है ।760 किमी लंबी ओमो नदी शेवान पर्वत श्रृंखलाओं से निकलकर केन्या की सीमा पर तुर्काना झील में मिलती है तथा गिबे इसकीं मुख्य सहायक नदी है ।इसके दूसरी ओर मागो नेशनल पार्क है ।नदी की निचली घाटी में स्थित किबिश के समीप की चट्टानों से 1967 में रिचर्ड लीके की टीम को दुनिया में होमो सेपियन्स के सर्वाधिक प्राचीन फासिल्स मिले ।यह दुनिया में आधुनिकआदमी के अस्तित्व का सबसे प्राचीनतम सबूत था।इस क्षेत्र को ओमो किबिश कहते हैं और यह यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है ।60 हजार वर्ष पूर्व यहाँ के लोगों ने ऑस्ट्रेलिया,यूरेशिया, मोरक्को और एशिया में जावा की ओर विस्थापन किया ।दुनिया में प्राचीनतम मानव वंश की 121 शाखाएँ शाखाएं मानी जाती है जिनमें अफ्रीका के 14 आदिवासी समूह जेनेटिकली डिस्टिंक्ट एन सेस्ट्रल पॉपुलेशन ग्रुप में शामिल है और बुशमैन खोइसान आदिवासियों को मानव का विशुद्ध प्राचीनतम वंशज माना जाता है ।आज ये सान आदिवासी काला हारी मरुस्थल,बोत्सवाना और नामीबिया के इटोशा नेशनल पार्क में रहते हैं ।

सैकड़ों वर्षों से इथिओपिया की प्राचीनतम मानव बसाहट मुर्शी,सूरी,न्यांगाटोन,दिझि,मोयन, आरी,बान्ना,बोदी,कारो और क्वेगु आदिवासियों का प्राकृतिक आशियाना रही है ।मुर्शी ,मोइन और सूरी को सम्मिलित रूप से सुरमा भी कहते है ।

मुर्शी दुनिया के बहुत ही प्राचीनतम एथनिक समूह है और आज दुनिया में इनकी संख्या मात्र 7500 ही बची है और वह भी मात्र ओमो नदी की घाटी में ही रहते है ।आधुनिक दुनिया से इनका नहीं के बराबर मेल मिलाप है और अपने अजूबे रीति रिवाजों,परम्पराओं,भाषा और संस्कृति के कारण दुनिया में इनकी अलग ही पहचान है ।इनके होठों के गोलाकार प्लेटों,विचित्र कर्ण आभूषणों,राख से बनाई गई फेस और बॉडी पेंटिंग और वीरता प्रदर्शित किए जाने के लिए लाठियों से किये जानेवाले द्वंद्व युद्ध के कारण यह सारी दुनिया के एथनिक समूहों में विशेष रूप से चर्चित है ।दुनिया में किसी भी अन्य संस्कृति में लिप प्लेट्स की ऐसी प्रथा नहीं हैं ।मुर्शी संस्कृति में लड़की जैसे ही किशोरावस्था पार करती है उसकी माँ उसके निचले हिस्से को चीरकर दो भागों में बांट देती है ।इसके 1 बर्ष बाद इन कटे हुए हिस्सों के बीच मिट्टी या लकड़ी से बनी गोलाकार प्लेट फसा दी जाती है ।प्लेट जितनी बड़ी होती है ,लड़की उतनी ही योग्य और प्रतिष्ठीत मानी जाती है ।

आज भले ही यह माना जाता है कि यह मुर्शी लोगों की प्राचीन प्रथा है किंतु यह तथ्य है कि जब अफ्रीका में दास के रूप में आदमी की खरीद फरोख्त होती थी,इन आदिवासियों ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए यह दर्दनाक तरीका चुना ताकि उन्हें कुरूप जानकर लोग उन्हें ले जा न सके।
कभी बराड़ प्रान्त में भी नागपुर के राजा द्वारा लूटपाट ,बर्बरता और नृशंश हत्या के लिए पाले गए चितु और उसके अन्य पेंढारी साथियों की बर्बर हवस से बचने सामान्य लोगों की लड़कियाँ अपने चेहरे को हांडी की मस(काली परत) से कुरूप बना देती थी ।

मुर्शी अपनी प्राचीन परम्पराओं के साथ हजारों वर्षों से ओमो की घाटी में ओमो और उसकी सहायक नदी के बीच पहाड़ियों से घिरे घने जंगलों के बीच बेहद आइसोलेटेड क्षेत्र में अपना जीवन यापन करते रहे ।अपने चेहरे और शरीर पर राख सेविचित्र पेंटिंग बनाकर दुनिया से बेखबर होकर जीने का उनका नितांत अलग अंदाज था ।किंतु 1960 में उनकी जमीन को नेशनल पार्क बना दिया गया ।फिर गिब्बे नदी पर बडी जलविद्युत परियोजना का आरम्भ किया गया ।पार्क और नई परियोजना के लिए मुर्शी लोगों को उनकी जमीन,जंगल और जल से बेदखल करने की शुरुआत भी हुई और 2005 में इसने जोर पकड़ लिया ।अब ओमो के एथनिक समूहों को उनके प्राकृतिक विरासत से बाहर खदेड़ने की कोशिशें की जा रही और दुनिया में आदमी के सबसे पुराने वंशज ये समूह अपने समाज और संस्कृति को बचाने के लिए निरंतर जूझ रहे हैं ।ये तो हमारे आदिम पूर्वजों के सही अर्थों में सच्चे प्रतिनिधि है ।आज दुनिया में अनेक नस्लों में बंटी हुई हजारों जातियां कई धर्मों और समाजों में विभाजित है किंतु सभी इस तथ्य से से न जाने क्यों बेख़बर है कि हम सभी का एक ही पूर्वज था ,लाखों वर्ष पूर्व जिसका आविर्भाव इथियोपिया के जंगलों में ओमो नदी की घाटी में हुआ था । लेेखक एवं साहित्यकार अजय सूर्यवंशी

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