एक था वो जमाना जिसकी याद आती है, भीम गीत लिरिक्स

एक था वो जमाना जिसकी याद आती है,  भीम गीत लिरिक्सएक था वो जमाना जिसकी याद आती है,
शर्म से गर्दन हमारी ये झुकी जाती है,

कोई दरवाजे पर ना हमको आने देते थे,
हमारे हाथ का वो पानी तक ना पीते थे,

यहा तक के पढना लिखना भी मना था हमको,
स्कूल मे पाँव तक रखना भी गुन्हा था हमको,

फिर कहा तालीम पाते किसको दर्द दिखलाते,
कौन सुनता हमारी आज हम कहाँ जाते,

मगर भगवान बनके भीम हमारे आये,
हमे हर जुल्मतों की आँधीयों से छुडवाये,

हमारे वास्ते स्कूल और कॉलेज खोले,
हर एक गरीब को स्कॉलरशिप दिलवाये,

कितने उपकार मेरे भीमने दलितोँ पर किये,
मगर अफसोस है कुछ लोग उन्हे भूल गये,

क्यूकि आज लीडर बने वकील कोई मिनीस्टर,
कोई डॉक्टर बना है और कोई प्रोफेसर,

कोई ऑफिस मे बना क्लर्क कोई ऑफिसर,
कोई बना है कमिश्नर पुलिस मे जाकर,

मगर वो अपनी जात धर्म को छिपाते है,
और हम कोई और है दुनिया को ये दिखाते है,

तो थु ऐसे जीने से मरना ही अच्छा है,
अरे इन्सान वो ही है ईमान जिसका सच्चा है…

प्रकाश पाटणकर..

castism of india

 

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